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कर्नाटक का सीएम कौन? सियासी लड़ाई अब मठों तक जा पहुंची, जानें सिद्धारमैया ने क्या कहा

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कर्नाटक सीएम की लड़ाई मठों तक पहुंची- India TV Hindi
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कर्नाटक सीएम की लड़ाई मठों तक पहुंची

कर्नाटक में कांग्रेस के सिद्धारमैया फिलहाल मुख्यमंत्री हैं और प्रदेश में सीएम बदलने को लेकर सियासी जंग जारी है। अब सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर सियासी अटकलें लगाई जा रही हैं। अब इन सभी अटकलों के बीच डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने एक कार्यक्रम में कहा कि शब्दों की ताकत ही दुनिया की ताकत है और वादा निभाना एक बड़ी ताकत है। वहीं, सीएम सिद्ध रामैया ने कहा है कि उन्हें अभी तक हाईकमान से कोई बुलावा नहीं आया है अगर कॉल आता है तो वो जाएंगे।




संदीप दीक्षित ने भाजपा पर कसा तंज

इस बीच, कांग्रेस नेता और पूर्व सासंद संदीप दीक्षित की भी प्रतिक्रिया सामने आई है और उन्होंने कहा है कि यह फैसला हाईकमान के ऊपर निर्भर करता है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर भी तंज कसा है और कहा है कि “बीजेपी अपने मन ही मन खुश हो ले, कर्नाटक में हम लोगों का पक्ष क्लियर है। अगर कोई नेतृत्व बदलाव होता है तो हमारे विधायक और हाईकमान तय करते हैं। बीजेपी की तरह नहीं कि पांच-पांच, छह-छह मुख्यमंत्री बदल दिए जाते हैं।”

​वहीं, कर्नाटक में चल रही सियासी जंग और सीएम पद को लेकर चल रही खींचतान की अटकलें अब मठों तक भी पहुंच गई है। इस मामले में चुनचुनगिरी मठ के प्रमुख स्वामी निर्मलानंद और कनका पीठ निरानंजना नंद पुरी स्वामी ने भी अब इसमें हस्तक्षेप किया है। जानें दोनों मठों के प्रमुख ने क्या कहा है…

स्वामी निर्मलानंदा ने क्या कहा-

पिछले चुनावों में वोक्कालिगा समाज ने इस मकसद के पार्टी को वोट किया था कि हमारे में से एक CM बनेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, हमे आशा थी कि ढाई साल के बाद ऐसा होगा लेकिन अब वो भी नहीं हो रहा है या फिर होता हुआ नहीं दिख रहा है,जिससे लोग नाराज हो रहे हैं,ऐसे हमारे कई अनुवाई हमें कॉन्टेक्ट करके बता रहे हैं जो सर्वविदित हैं, हाई कमान को इस दिशा में स्पष्टता के साथ काम करना चाहिए,ढाई साल बाद D K शिवकुमार CM बनेंगे ये हमारी भी आशा थी और समाज के लोगों की भी आशा थी, हाईकमान को ये काम करना चाहिए।

निरानंजना नंद पुरी स्वामी ने कहा-

संविधान में मठाधीश के कहने पर CM चुनने की आजादी है क्या? संविधान के हिसाब से CM को चुनने या बदलने का अधिकार सिर्फ विधायकों को है, ऐसे में सिर्फ विधायकों को इस बारे में फैसला करना चाहिए संतों को इससे बचना चाहिए।

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