Home » राष्ट्रीय » Indian Navy Day: भारतीय नौसेना चीन और पाकिस्तान से कितना मजबूत? आंकड़े देख नेवी पर गर्व करेंगे

Indian Navy Day: भारतीय नौसेना चीन और पाकिस्तान से कितना मजबूत? आंकड़े देख नेवी पर गर्व करेंगे

Share :

इंडियन नेवी पाकिस्तान-चीन से कितना मजबूत- India TV Hindi
Image Source : X@INDIANNAVY
इंडियन नेवी पाकिस्तान-चीन से कितना मजबूत

नई दिल्लीः आज यानी 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस मनाया जा रहा है। इंडियन नेवी दुनिया की पांचवी बड़ी महाशक्ति है। ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग 2025 के मुताबिक, अमेरिका पहले नंबर पर है जबकि चीन दूसरे नंबर पर है। रूस तीसरे, जापान चौथे और पांचवे नंबर पर भारत की नौसेना है। पाकिस्तानी नेवी का स्थान 27वें नंबर पर आता है। 

भारत की नौसेना के सामने पाकिस्तान कहीं नहीं ठहरता

भारतीय नौसेना के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर, INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत हैं। नौसेना के बेड़े में कई विध्वंसक युद्धपोत, फ्रिगेट और कॉर्वेट शामिल हैं। नेवी के पास 17 से अधिक पनडुब्बियां हैं, जिनमें से कुछ परमाणु मिसाइलें दागने में सक्षम हैं। नौसेना के पास 139 से अधिक पेट्रोल शिप भी हैं। नौसेना लगातार आधुनिकीकरण कर रही है, जिसमें स्वदेशी जहाज निर्माण, आधुनिक ड्रोन, रोबोटिक सिस्टम और राफेल-एम फाइटर जेट जैसे नए लड़ाकू विमान शामिल हैं। 

नेवी के बेड़े में 150 वेसल और सबमरीन और 300 एयरक्राफ्ट 

इंडियन नेवी के बेड़े में एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, कॉर्वेट, सबमरीन, पेट्रोल वेसल और एम्फीबियस वॉरफेयर शिप शामिल हैं। इंडियन नेवी में लगभग 67,252 एक्टिव नौसैनिक और 75,000 रिज़र्व नौसैनिक हैं। नेवी में महिलाएं भी सेवा दे रही हैं। नेवी के बेड़े में 150 वेसल और सबमरीन और 300 एयरक्राफ्ट हैं। 

भारतीय नेवी की ताकत

एयरक्राफ्ट कैरियर: INS विक्रमादित्य और नया शामिल INS विक्रांत नेवी के सबसे अहम एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, जो भारत की एयर पावर दिखाने की क्षमता दिखाते हैं। इन कैरियर को कोलकाता-क्लास और विशाखापत्तनम-क्लास जैसे ताकतवर डिस्ट्रॉयर का सपोर्ट मिलता है, जो अलग-अलग मिशन के लिए एडवांस्ड मिसाइलों से लैस हैं। INS विक्रमादित्य को इंडियन नेवी के सबसे बड़े जहाज़ों में से एक कहा जाता है। यह 20 मंज़िला है। INS विक्रांत 36 एयरक्राफ्ट वाला एक एयर ग्रुप ले जा सकता है और इसमें एंटी-सरफेस और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर एबिलिटी के साथ STOBAR कॉन्फ़िगरेशन है।

फ्रिगेट: फ्रिगेट मीडियम साइज़ के वॉरशिप होते हैं जो नेवल की भाषा में मिसाइल डिस्ट्रॉयर से एक लेवल नीचे आते हैं। नेवी के पास शिवालिक-क्लास फ्रिगेट हैं, जो अपने स्टेल्थ और एडवांस्ड हथियारों के लिए जाने जाते हैं, और कामोर्टा-क्लास कॉर्वेट, जो एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, कोस्टल डिफेंस में अहम भूमिका निभाते हैं। इनमें INS नीलगिरी, INS तुषिल, INS तमाल, INS हिमगिरी प्रमुख रूप से शामिल हैं।  इसी साल पीएम मोदी ने नौसेना के तीन युद्धपोतों INS सूरत, INS नीलगिरि और INS वाघशीर को देश को समर्पित किया था।


 

 INS सूरत, INS नीलगिरी और INS वाघशीर के बारे में जानें

INS सूरत: INS सूरत P15B गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर प्रोजेक्ट का चौथा और आखिरी शिप है, जो दुनिया के सबसे बड़े और सबसे एडवांस्ड डिस्ट्रॉयर में से एक है। यह शिप ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और लंबी दूरी की सरफेस-टू-एयर मिसाइल (SAM) से लैस है। इसमें कई स्वदेशी हथियार सिस्टम हैं जैसे मीडियम रेंज SAMs, स्वदेशी टॉरपीडो ट्यूब लॉन्चर, एंटी-सबमरीन स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और 76-mm सुपर रैपिड गन माउंट से लैस है।  

INS नीलगिरी: यह P17A स्टील्थ फ्रिगेट प्रोजेक्ट का पहला जहाज है जिसे इंडियन नेवी के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो ने डिज़ाइन किया है। नेवी के मुताबिक, INS नीलगिरी शिवालिक-क्लास फ्रिगेट की तुलना में एक बड़ी तरक्की है, जिसमें स्टेट-ऑफ़-द-आर्ट टेक्नोलॉजी के ज़रिए महत्वपूर्ण स्टेल्थ फीचर्स और कम रडार सिग्नेचर शामिल हैं। नीलगिरी और सूरत दोनों ही कई तरह के हेलीकॉप्टर ऑपरेट कर सकते हैं, जिनमें चेतक, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और नया शामिल MH-60R शामिल हैं। INS नीलगिरी के ज़बरदस्त हथियारों में ब्रह्मोस क्रूज़ मिसाइल और बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। एडवांस्ड स्टेल्थ फीचर्स और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमताओं से लैस, यह शिप नेवी की कम्युनिकेशन के ज़रूरी समुद्री लेन (SLOCs) को सुरक्षित करने और इस इलाके में चीन की मौजूदगी को काउंटरबैलेंस करने की क्षमता को मज़बूत करता है।

INS वाघशीर: फ्रांस के नेवल ग्रुप के साथ पार्टनरशिप में बनी यह नेवी की अंडरसी वॉरफेयर क्षमताओं को मज़बूत करती है। वाघशीर का नाम सैंड फिश के नाम पर रखा गया है, जो हिंद महासागर का एक खतरनाक गहरे समुद्र का शिकारी है। इसकी लड़ाकू क्षमताओं में टॉरपीडो और ट्यूब-लॉन्च्ड एंटी-शिप मिसाइल जैसे सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों का इस्तेमाल शामिल है, जो हमले और बचाव दोनों तरह के नेवल ऑपरेशन में इसकी भूमिका को और मज़बूत करता है।

 डिस्ट्रॉयर: ये वर्सेटाइल सरफेस कॉम्बैटेंट हैं जो अलग-अलग अटैकिंग और डिफेंसिव रोल के लिए तैयार हैं। INS कोलकाता, इंडियन नेवी के लिए बनाए गए गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर के कोलकाता क्लास का हिस्सा है, जिसे प्रोजेक्ट 15 A के नाम से भी जाना जाता है। INS विशाखापत्तनम स्टेल्थ-मिसाइल गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर है। 

भारत के पास बैलिस्टिक सबमरीन 

अभी हाल में ही नेवी चीफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा था कि भारत जल्द ही अपनी तीसरी स्वदेशी न्यूक्लियर बैलिस्टिक सबमरीन INS अरिधमान को नौसेना में शामिल करेगा। जब INS अरिधमान सेना में शामिल होती तो भारत के पास पहली बार समुद्र में तीन ऑपरेशनल बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन होंगी। 

नेवी को चार राफेल 2029 तक मिलेंगे

एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा है कि इंडियन नेवी को 2029 तक चार राफेल जेट का पहला सेट मिलने की संभावना है। इसी साल 25 अप्रैल को 26 राफेल एयरक्राफ्ट के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया था। इसके आने से नौसेना और मजबूत हो जाएगी।

 चीन और पाकिस्तान से तुलना

इंडियन नेवी के पास मौजूदा समय में दो एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत हैं, जोकि ऑपरेशनल हैं। चीन के पास भी दो एयरक्राफ्ट कैरियर है। पाकिस्तान के पास एक भी नहीं है। भारत के पास 18 सबमरीन यानी पनडुब्बियां हैं। इनमे से तीन परमाणु मिसाइलें दाग सकती हैं। जबकि चीन के पास 78 तो पाकिस्तान के पास 9 पनडुब्बियां हैं। भारत के पास 12 फ्रिगेट्स हैं जबकि चीन के पास 42 तो पाकिस्तान के पास महज छह ही हैं। इंडियन नेवी के पास 138 गश्ती जहाज है जबकि चीनी नेवी में 150 तो पाकिस्तान के पास दो हैं। 

भारत के पास 12 विध्वंसक युद्धपोत (डेस्ट्रॉयर) हैं जबकि चीन के पास 49 विध्वंसक युद्धपोत हैं। पाकिस्तान के पास दो डेस्ट्रॉयर है। भारत आने वाले 10 सालों में 96 जहाज और पनडुब्बियों की नौसेना में शामिल करेगा। भारत के पास 2030 तक 160 वॉरशिप होगी। जबकि चीन भी अपनी ताकत बढ़ा रहा है। 

 

 

Latest India News

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Advertisement
How to Make a News Portal
Cricket Score
सबसे ज्यादा पड़ गई
Share Market
Rashifal